يتناول كتاب مصطلح الإشارات في القراءات الزوائد المروية عن الثقات دراسة علمية دقيقة تُعنى بضبط المصطلح القرائي المتصل بالإشارات، وبيان موقعه المنهجي في التعامل مع القراءات الزائدة التي رُويت عن أئمة ثقات خارج نطاق المتواتر المشهور، مع الحفاظ على الميزان العلمي بين الرواية والدراية. يقدّم المؤلف تمهيدًا يحرّر فيه مفهوم الإشارات في اصطلاح القرّاء، ويفرّق بين ما يُذكر للإفادة والبيان وما يُعتمد في الأداء والرواية، ثم يعرّف بالقراءات الزوائد وحدود الاحتجاج بها ومجالات الإفادة منها. ويعالج الكتاب محاوره الرئيسة عبر استقراء نماذج من هذه القراءات المروية عن الثقات، وبيان كيفية الإشارة إليها في كتب القراءات، ومقاصد العلماء من ذكرها، سواء في التوجيه اللغوي أو التفسيري أو في بيان سعة الأداء. ويعتمد المؤلف منهجًا تحليليًا استقرائيًا يقوم على جمع النصوص القرائية، ثم دراستها في ضوء أصول علم القراءات وقواعد قبول الرواية، مع تحرير دقيق للمصطلحات ودفع الالتباس بينها. وتمتاز مادة الكتاب بالدقة والتحقيق، مع لغة عربية فصيحة رصينة وأسلوب أكاديمي متماسك يجمع بين العمق النظري والوضوح المنهجي. كما يظهر فيه وعيٌ بأهمية التفريق بين القراءة المتعبَّد بتلاوتها والقراءة المذكورة على سبيل الإشارة والبيان العلمي. ويستهدف الكتاب طلاب علم القراءات، والباحثين في مصطلحاته، ودارسي الروايات الزائدة، لما يقدّمه من إطار منهجي منضبط لفهم هذا الباب الدقيق. وتكمن قيمته العلمية في إسهامه في ضبط مصطلح الإشارات، وترشيد الإفادة من القراءات الزوائد دون إخلال بأصول التلقي، مما يجعله إضافة نوعية إلى الدراسات القرآنية المتخصصة في علم القراءات.
المحتويات
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المقدمة : |
7 |
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البابة الأولى : الدراسة |
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الفصل الأول : المؤلف |
11 |
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المبحث الأول : حياته |
13 |
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اسمه وكنيته ولقبه |
13 |
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نشأته |
13 |
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رحلته الى القاهرة |
13 |
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شيوخه |
14 |
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تلاميذه |
16 |
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وفاته |
17 |
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المبحث الثاني : ثقافته وجهوده العلمية |
18 |
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المبحث الثالث : آثاره |
21 |
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مؤلفاته في القراءات |
21 |
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مؤلفاته في النحو |
24 |
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مؤلفاته في علم الهيئة |
24 |
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الفصل الثاني : الكتاب |
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المبحث الأول : اسم الكتاب وتوثيق نسبته إلى المؤلف |
29 |
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اسم الكتاب |
29 |
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توثيق نسبة الكتاب إلى المؤلف |
30 |
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المبحث الثاني : منهج المؤلف في الكتاب وأبرز سماته |
31 |
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منهج المؤلف في الكتاب |
31 |
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أبرز سمات منهجه |
39 |
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المبحث الثالث : مستندات الكتاب وأهميته |
42 |
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مستندات الكتاب |
42 |
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أهميته |
43 |
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المبحث الرابع : وصف نسخه المخطوطه |
49 |
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المبحث الخامس : بيان منهج التحقيق ومصطلحاته |
54 |
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بيان منهج التحقيق |
54 |
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تفسير الرموز والمصطلحات |
56 |
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الخاتمة |
57 |
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نماذج من مخطوطات الكتاب |
59 |
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البابة الثانية : مصطلح الإشارات في القراءات الزوائد المروية عن الثقات |
73 |
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صلى الله باب اتصال قرائتي بهؤلاء الأئمة الستة واتصال قراءتهم بالنبي |
78 |
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إسناد قراءة أبي جعفر |
78 |
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إسناد قراءة ابن محيصن |
82 |
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إسناد قراءة يعقوب |
84 |
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إسناد قراءة الحسن |
89 |
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إسناد قراءة الأعمش |
91 |
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إسناد اختيار خلف |
92 |
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باب الإدغام الكبير |
93 |
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باب الإدغام الصغير |
93 |
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باب النون الساكنة والتنوين |
103 |
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باب المد والقصر |
105 |
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باب الهمزتين في كلمة |
108 |
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باب الهمزتين من كلمتين |
109 |
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باب الهمز المفرد |
111 |
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باب مذهب الأعمش في الوقف على الهمز |
116 |
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باب الفتح والإمالة وبين اللفظين |
118 |
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باب السكت |
126 |
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باب الوقف على أواخر الكلم |
127 |
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باب الاستعاذة والبسملة |
129 |
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سورة الفاتحة |
131 |
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سورة البقرة |
135 |
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سورة آل عمران |
180 |
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سورة النساء |
198 |
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سورة المائدة |
213 |
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سورة الأنعام |
225 |
|
سورة الأعراف |
245 |
|
سورة الأنفال |
262 |
|
سورة التوبة |
268 |
|
سورة يونس |
278 |
|
سورة هود |
286 |
|
سورة يوسف |
295 |
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سورة الرعد |
306 |
|
سورة إبراهيم |
310 |
|
سورة الحجر |
314 |
|
سورة النحل |
318 |
|
سورة الإسراء |
324 |
|
سورة الكهف |
332 |
|
سورة مريم |
345 |
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سورة طه |
351 |
|
سورة الأنبياء |
363 |
|
سورة الحج |
369 |
|
سورة المؤمنون |
376 |
|
سورة النور |
382 |
|
سورة الفرقان |
389 |
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سورة الشُّعراء |
394 |
|
سورة النمل |
399 |
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سورة القصص |
407 |
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سورة العنكبوت |
413 |
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سورة الروم |
416 |
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سورة لقمان |
419 |
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سورة السجدة |
422 |
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سورة الأحزاب |
424 |
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سورة سبا |
430 |
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سورة فاطر |
437 |
|
سورة يس |
440 |
|
سورة الصافات |
448 |
|
سورة ص |
453 |
|
سورة الزمر |
457 |
|
سورة فصلت |
468 |
|
سورة الشورى |
470 |
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سورة الزخرف |
472 |
|
سورة الدخان |
479 |
|
سورة الجاثية |
482 |
|
سورة الأحقاف |
485 |
|
سورة محمد |
489 |
|
سورة الفتح |
492 |
|
سورة الحجرات |
495 |
|
سورة ق |
497 |
|
سورة الذاريات |
499 |
|
سورة الطور |
501 |
|
سورة و النجم |
503 |
|
سورة القمر |
507 |
|
سورة الرحمن |
510 |
|
سورة الواقعة |
513 |
|
سورة الحديد |
516 |
|
سورة المجادلة |
518 |
|
سورة الحشر |
521 |
|
سورة الممتحنة |
523 |
|
سورة الصف |
524 |
|
سورة الجمعة |
525 |
|
سورة المنافقون |
525 |
|
سورة التغابن |
527 |
|
سورة الطلاق |
527 |
|
سورة التحريم |
528 |
|
سورة الملك |
529 |
|
سورة القلم |
530 |
|
سورة الحاقة |
532 |
|
سورة المعارج |
533 |
|
سورة نوح |
535 |
|
سورة الجن |
537 |
|
سورة المزمل |
539 |
|
سورة المدثر |
540 |
|
سورة القيامة |
541 |
|
سورة الإنسان |
543 |
|
سورة المرسلات |
545 |
|
سورة النبإ |
547 |
|
سورة النازعات |
548 |
|
سورة عبس |
549 |
|
سورة التكوير |
551 |
|
سورة الانفطار |
552 |
|
سورة التطفيف |
553 |
|
سورة الأنشقاق |
554 |
|
سورة البروج |
554 |
|
سورة الطارق |
555 |
|
سورة الأعلى |
556 |
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سورة الغاشية |
556 |
|
سورة الفجر |
557 |
|
سورة البلد |
559 |
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سورة الشمس |
561 |
|
سورة الليل |
561 |
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سورة والضحى |
561 |
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ومن سورة النشراح إلي القرآن |
562 |
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العلق |
562 |
|
القدر |
562 |
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البينة |
563 |
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سورة الزلزلة |
563 |
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سورة العاديات |
564 |
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سورة القارعة |
564 |
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سورة التكاثر |
564 |
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سورة الفلق |
568 |
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باب التكبير |
569 |
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جريدة المظان والأصول |
570 |
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ملخص الكتاب بالانكليزية |
590 |