يُعدُّ هذا الكتاب مرجعًا متخصصًا في قراءة ابن عامر الشامي من خلال طريقي الشاطبية والدّرة، حيث يهدف إلى بيان أصولها وفروعها وأحكامها، وقد صدر في حوالي 191 صفحة عن دار الصحابة بطنطا عام 2008م. يبدأ المؤلّف بمقدمة تضم ترجمة للإمام ابن عامر، كما يعرض تراجم هشام وابن ذكوان من رواته، ثم ينتقل إلى عرض أصول قراءة ابن عامر – أي القواعد الأساسية التي تقوم عليها هذه القراءة – قبل أن يعرض نصوصها تطبيقًا من سورة الفاتحة إلى آخر سور القرآن، مع إبراز الفوارق بين طريق الشاطبية والدّرة من حيث الأداء القرائي والأحكام التجويدية. منهج المؤلف في العرض يجمع بين المنهج التحليلي الوصفي والتوثيقي؛ فهو يعرض النص القرائي، ويقارن بين الروايات المختلفة له في المسالك، مبيّنًا نقاط الاختلاف وبيان الوجه المرجّح عنده، مع الاستدلال بالروايات المتوفرة والمنهج القرائي السائد. من المميزات الفنية والعلمية في هذا العمل: اللغة فصيحة ومناسبة للتخصّص القرائي، الأسلوب منظم حسب السور مع فهارس تيسّر الانتقال بين الموضوعات، والاعتماد على المصادر القرائية المعتبرة، مع مراعاة تقديم شروح واضحة للفوارق القرائية بين المسالك. الفئة المستهدفة هي طلبة علوم القرآن وعلوم القراءات، والمقرئون المهتمّون بقراءة ابن عامر، بحيث يجدون فيه مرجعًا مفصّلًا في تطبيقات هذه القراءة عبر المصحف مرتبة تمهيدًا للتجويد أو المقارنة. والقيمة التي يضيفها تكمن في إضاءة قراءة ابن عامر بمسالكها التفصيلية وبيان تعلُّقاتها بالشاطبية والدّرة، مما يساهم في إثراء المكتبة القرائية بمرجع مخصص يتيح فهمًا أعمق للفروق بين المسالك القرائية، وهو مرجع يُستدعى عند مقارنة قراءات الشام والمشرق.
فهرس المحتويات
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الصفحة |
الموضوع |
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5 |
تقديم |
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9 |
التعريف بالإمام ابن عامر الشامي |
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10 |
ترجمة هشام |
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11 |
ترجمة ابن ذكوان |
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13 |
أصول قراءة ابن عامر |
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37 |
سورة الفاتحة – البقرة |
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42 |
سورة آل عمران |
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46 |
سورة النساء |
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49 |
سورة المائدة |
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52 |
سورة الأنعام |
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57 |
سورة الأعراف |
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62 |
سورة الأنفال |
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63 |
سورة التوبة |
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65 |
سورة يونس |
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68 |
سورة هود |
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71 |
سورة يوسف |
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73 |
الرعد |
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74 |
سورة إبراهيم |
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75 |
سورة الحجر |
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76 |
سورة النحل |
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78 |
سورة الإسراء |
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80 |
سورة الكهف |
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83 |
سورة مريم |
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85 |
سورة طه |
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86 |
سورة الأنبياء |
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88 |
سورة الحج |
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89 |
سورة المؤمنون |
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90 |
سورة النور |
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92 |
سورة الفرقان |
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93 |
سورة الشعراء |
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95 |
سورة النمل |
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97 |
سورة القصص |
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99 |
سورة العنكبوت |
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100 |
سورة الروم |
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101 |
سورة لقمان |
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103 |
سورة السجدة – الأحزاب |
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104 |
سورة سبأ |
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105 |
سورة فاطر |
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106 |
سورة يس |
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107 |
سورة الصافات |
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109 |
سورة ص |
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110 |
سورة الزمر |
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112 |
سورة غافر |
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113 |
سورة فصلت |
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114 |
سورة الشورى |
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115 |
سورة الزخرف |
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116 |
سورة الدخان |
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117 |
سورة الجاثية |
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118 |
سورة الأحقاف |
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119 |
سورة محمد – الفتح |
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120 |
سورة الحجرات – ق |
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121 |
سورة الذاريات – النجم |
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122 |
سورة القمر |
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123 |
سورة الرحمن – الواقعة |
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124 |
سورة الحديد |
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125 |
سورة المجادلة – الحشر |
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126 |
سورة الممتحنة – الصف |
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127 |
سورة الجمعة – الطلاق |
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128 |
سورة التحريم – الملك |
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129 |
سورة القلم – الحاقة |
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130 |
سورة المعارج – الجن |
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131 |
سورة المزمل – المدثر |
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132 |
سورة القيامة – المرسلات |
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133 |
سورة النبأ – عبس |
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134 |
سورة التكوير – الانفطار |
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135 |
سورة المطففين – الأعلى |
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136 |
سورة الغاشية – الشمس |
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137 |
سورة الليل – البينة |
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138 |
سورة الزلزلة – الهمزة |
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139 |
سورة الفيل – النصر |
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140 |
سورة المسد – الناس |
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141 |
الفرق بين طريق الشاطبية والتيسير |
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161 |
الفرق بين الشاطبية والطيبة |
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185 |
فهرس المراجع |
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187 |
فهرس المحتويات |