ينطلق هذا الكتاب من همّ علمي واضح وهو خدمة موضوع قراءة القرآن وتبيين أوجهها المتنوعة عبر ما يُعرف بـ «القراء السبعة» المعروفين بين أهل القراءات، إذ يضع مؤلفه — بعد تحقيق وتحليل — مرجعاً منظَّماً يجمع بين التاريخ، السند، الرواية، الرسم، والتنزيل لتلك القراءات، بدايةً من تقديم ترجمة للقارئ والمؤلف، مروراً بعرض الأسانيد والرواة وطرق النقل، ثم الانتقال إلى التحقيق اللغوي والضبطي لأحكام التجويد، الرسم والقراءة المنسوبة لكل إمام من الأئمة السبعة، مع إبراز ما ورد من اختلافات — سواء في همزات، إمالة، الوقف، التلاوة ـ ليعرضها بضمير تحقيق يبيّن الأوجه الثابتة والمعتبرة منها. موضوع الكتاب يشمل — بحسب فهرسه المفصل — أسماء القراء، رواياتهم، أسانيدهم، أحكام التجويد الخاصة بكل قراءة، مسائل وقفية كنقاط الوقف على الهاء أو الإشمام ونقل الحركات، اختلاف القراء في الوقف أو الرسم، ثم عرض المصاحف أو النصوص بحسب كل قراءة مع وضع النص المحقق. منهج المؤلّف منهج تأصيلي وتحقيقي-وصف-تحليلي: أولاً يعرض الخلفية التاريخية والمصادر والنسخ الخطية، ثم ينقد أسانيد الروايات ويقارن بين الموجود منها والمروي، بعد ذلك يناقش الفروق الصوتية والنحوية والضبطية، ويقدّم قراءة مضبوطة يُمكن الاعتماد عليها، مع فهرس وتنظيم يُناسب الباحث والدارس. من حيث المميزات الفنية والعلمية، يتميز الكتاب بشموليته (حيث الصفحات تبلغ نحو 517 صفحة) ، وقدرته على ربط المسائل التجويدية والرواية برسم المصحف والنقل — ما يجعله عملاً متكاملاً بين علمَي الرواية والتجويد؛ لغة الكتاب عربية فصيحة، أسلوبه منضبط، ويبدو أنه مُعدّ بدقة تحقيقية عالية — معلومات عن النسخ الخطية، وصف لها، وتحقيق النص — ما يمنحه مصداقية عند الطلبة والباحثين. الفئة المستهدفة من هذا العمل هي طلبة علوم القرآن والقراءات، المقرئون، المحققون، دارسو التجويد والرسم، ومدرّسو الإقراء، وكذلك الباحثون في أصول التلاوة والرواية العربية، لأن الكتاب يجمع بين النقل المروي التاريخي وبين التحقيق المعاصر — وبالتالي يُناسب من يريد اعتماد قراءة متقنة ومحققة. أما القيمة العلمية والثقافية للكتاب فتتمثل في أنه يسدّ فراغاً مهمّاً في المكتبة القرآنية: إذ لا يكتفي بمجرد سرد الروايات أو تبسيطها، بل يحقّق الأسانيد، يدرس الفروق، يبيّن الثابت من المتواتر، ويقدّم قراءة مضبوطة قائمة على دراسة، ما يرفع من مستوى التلاوة ويُعزِّز الثقة بما تنقله الروايات من اختلافات — ليس باعتباره شوذوذا، بل بكونها منهاجاً قرائياً معتمداً.
فهرس الموضوعات
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ملخص الرسالة |
3 |
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إهداء |
5 |
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شكر وتقدير |
6 |
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المقدمة |
8 |
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أهمية الموضوع وأسباب اختياره |
9 |
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الدراسات السابقة |
10 |
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خطة البحث |
10 |
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منهج التحقيق |
13 |
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وصف النسخ الخطية |
15 |
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القسم الأول : الدراسة |
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الفصل الأول: ترجمة المؤلف |
17 |
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المبحث الأول: حياة المؤلف |
18 |
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المطلب الأول: اسمه ونسبه |
18 |
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المطلب الثاني: شيوخه وتلاميذه |
18 |
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المطلب الثالث: آثاره العلمية |
18 |
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المطلب الرابع: مكانته العلمية |
19 |
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المطلب الخامس: وفاته |
19 |
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المبحث الثاني: عصر المؤلـــــــف |
20 |
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المطلب الأول: الأوضاع السياسية في عصره |
20 |
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المطلب الثاني: الحياة الاجتماعية في عصره |
23 |
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المطلب الثالث: الحياة العلمية في عصره |
25 |
|
المطلب الرابع: الحياة الدينية في عصره |
25 |
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المبحث الثالث : مقارنة بين مؤلفه مؤلفات علم القراءات في القرن الرابع الهجري |
28 |
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المطلب الأول: المؤلفات في قراءات القراء في القرن الرابع |
28 |
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المطلب الآخر : مقارنة بين مؤلفه ومؤلفات علم القراءات في القرن الرابع الهجري |
32 |
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الفصل الثاني : دراسة الكتاب |
39 |
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المبحث الأول: تحقيق اسم الكتاب |
39 |
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المبحث الثاني: توثيق نسبة الكتاب إلى مؤلفه |
40 |
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المبحث الثالث: مصادر المؤلف في كتابه |
42 |
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المبحث الرابع: منهج المؤلف في كتابه |
42 |
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المبحث الخامس : قيمة الكتاب العلمية |
43 |
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المبحث السادس: وصف النسخة الخطية للكتاب ونماذج منها |
46 |
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نماذج من المخطوط |
48 |
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القسم الثاني : النص المحقق ( الكتاب كاملاً ) |
52 |
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بسم الله الرحمن الرحيم |
53 |
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باب في أسماء القراء السبعة، وأسماء الرواة، وحاملي القراءة عنهم |
56 |
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باب التنبيه على الحرص على التجويد وتسهيل طريقته |
61 |
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باب ذكر الأسانيد في القراءات عن أئمة الأمصار السبعة |
70 |
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باب ذكر الاستعاذة في القراءة |
104 |
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باب اختلاف القراء في البسملة |
107 |
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باب الإمالة |
109 |
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باب الوقف على ما قبل هاء التأنيث |
134 |
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باب الإشمام في الوقف |
137 |
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باب ذكر الوقف على الهاء |
138 |
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باب الخلاف في فاتحة الكتاب |
140 |
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باب الهاء التي يكنى بها عن المذكر |
144 |
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باب مد حرف لحرف وهيئة الاعتبار |
146 |
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باب الاختلاف في الهمزتين من كلمة وكلمتين |
148 |
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باب الهمزتين المختلفتين من كلمة |
149 |
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باب في الهمزتين المختلفتين من كلمة الأولى مفتوحة والثانية مضمومة |
151 |
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باب في الهمزتين المتفقتين بالفتح من كلمتين |
151 |
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باب في الهمزتين المتفقتين من كلمتين بالضم |
152 |
|
باب في الهمزتين المتفقتين بالكسر من كلمتين |
152 |
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باب الهمزتين المختلفتين من كلمتين الأولى مضمومة والثانية مفتوحة |
153 |
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باب في الهمزتين المختلفتين من كلمتين |
153 |
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باب في الهمزتين المختلفتين من كلمتين الأولى مفتوحة والثانية مكسورة |
154 |
|
باب في الهمزتين المختلفتين من كلمتين الأولى مكسورة والثانية مفتوحة |
154 |
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باب في الهمزتين المختلفتين من كلمتين الأولى مفتوحة والثانية مضمومة |
154 |
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باب نقل الحركات وترتيبها |
155 |
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باب في الهمز وتركه في الساكن والمتحرك |
156 |
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باب ذكر الإظهار والإدغام |
159 |
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باب دال قد |
160 |
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باب تاء التأنيث |
161 |
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باب إدغام الباء في الفاء في خمسة مواضع وإظهارها |
162 |
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باب لام هل وبل في ثمانية أحرف |
163 |
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باب خمسة أصول من الإدغام والإظهار |
162 |
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باب في الغنة |
166 |
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باب فرش الحروف |
168 |
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سورة البقرة |
168 |
|
سورة آل عمران |
199 |
|
سورة النساء |
210 |
|
سورة المائدة |
218 |
|
سورة الأنعام |
223 |
|
سورة الأعراف |
235 |
|
سورة الأنفال |
245 |
|
سورة التوبة |
249 |
|
سورة یونس |
253 |
|
سورة هود |
257 |
|
سورة يوسف |
262 |
|
سورة الرعد |
268 |
|
سورة ابراهیم |
273 |
|
سورة الحجر |
275 |
|
سورة النحل |
277 |
|
سورة الإسراء |
280 |
|
سورة الكهف |
285 |
|
سورة مريم |
294 |
|
سورة طه |
299 |
|
سورة الأنبياء |
304 |
|
سورة الحج |
307 |
|
سورة المؤمنين |
310 |
|
سورة النور |
315 |
|
سورة الفرقان |
318 |
|
سورة الشعراء |
321 |
|
سورة النمل |
324 |
|
سورة القصص |
329 |
|
سورة العنكبوت |
332 |
|
سورة الروم |
335 |
|
سورة لقمان |
338 |
|
سورة الجرز |
340 |
|
سورة الأحزاب |
341 |
|
سورة سبأ |
344 |
|
سورة الملائكة |
348 |
|
سورة يس |
350 |
|
سورة الصافات |
353 |
|
سورة ص |
355 |
|
سورة الزمر |
358 |
|
سورة المؤمن |
361 |
|
سورة السجدة |
366 |
|
سورة الشورى |
367 |
|
سورة الزخرف |
369 |
|
سورة الدخان |
373 |
|
سورة الجاثية |
374 |
|
سورة الأحقاف |
376 |
|
سورة محمد (ص) |
378 |
|
سورة الفتح |
379 |
|
سورة الحجرات |
381 |
|
سورة ق |
382 |
|
سورة الذاريات |
383 |
|
سورة الطور |
384 |
|
سورة النجم |
385 |
|
سورة القمر |
387 |
|
سورة الرحمن |
388 |
|
سورة الواقعة |
390 |
|
سورة الحديد |
391 |
|
سورة المجادلة |
393 |
|
سورة الحشر |
395 |
|
سورة الممتحنة |
396 |
|
سورة الصف |
397 |
|
سورة المنافقون |
398 |
|
سورة التغابن |
399 |
|
سورة الطلاق |
399 |
|
سورة التحريم |
400 |
|
سورة الملك |
401 |
|
سورة ن القلم |
402 |
|
سورة الحاقة |
403 |
|
سورة الواقع |
404 |
|
سورة نوح (ع) |
406 |
|
سورة الجن |
407 |
|
سورة المزمل |
408 |
|
سورة المدثر |
409 |
|
سورة القيامة |
410 |
|
سورة الإنسان |
411 |
|
سورة المرسلات |
412 |
|
سورة النبأ |
413 |
|
سورة النازعات |
414 |
|
سورة عبس |
415 |
|
سورة التكوير |
416 |
|
سورة الانفطار |
416 |
|
سورة التطفيف |
417 |
|
سورة الانشقاق |
418 |
|
سورة البروج |
418 |
|
سورة الطارق |
419 |
|
سورة الأعلى |
419 |
|
سورة الغاشية |
420 |
|
سورة الفجر |
421 |
|
سورة البلد |
422 |
|
سورة والشمس |
423 |
|
سورة والليل |
424 |
|
سورة العلق |
424 |
|
سورة القدر |
425 |
|
سورة لم يكن |
425 |
|
سورة الزلزلة |
426 |
|
سورة القارعة |
426 |
|
سورة التكاثر |
428 |
|
سورة قريش |
428 |
|
سورة الكافرون |
429 |
|
سورة المسد |
430 |
|
سورة الإخلاص |
430 |
|
سورة الفلق |
431 |
|
سورة الناس |
432 |
|
الخاتمة |
435 |
|
الفهارس |
437 |
|
فهرس الآيات القرآنية |
438 |
|
فهرس الأحاديث النبوية |
468 |
|
فهرس الأبيات الشعرية |
469 |
|
فهرس الأعلام |
470 |
|
فهرس الأماكن والبلدان |
483 |
|
فهرس المصادر والمراجع |
485 |
|
فهرس الموضوعات |
509 |