يُعَدّ هذا الكتاب من الإصدارات الموجَّهة التي تجمع بين الحفظ والتلاوة، إذ يهدف إلى مساعدة القارئ أو المقرئ على حفظ القرآن بطريقة متقنة تقارب قراءة النبي ﷺ مع مراعاة أحكام التلاوة والتجويد، ويبلغ عدد صفحاته حوالي 159 صفحة كما ورد في فهرس المكتبة الإلكترونية. يناقش المؤلف في محاوره التمهيدية فضل القرآن، وسبل التيسير في الحفظ، ثم ينتقل إلى ضوابط الحفظ (الاستمرارية، مراجعة الحفظ، التدرّج)، ويعرض كذلك آداب الحفظ والتلاوة (كالطهارة، استقبال القبلة، السواك، التأني في الأداء)، ثم يدخل في مباحث علم التجويد وأحكام التلاوة: المخارج والصفات، أحكام النون الساكنة والتنوين، الميم الساكنة، المدود، والوقف والابتداء، مع أمثلة وعينات قرائية. ) منهج المؤلّف يجمع بين المنهج التربوي والتجريبي: يعرض القاعدة أو الحكم، ثم الأمثلة التطبيقية، ويشجّع الممارَسة العملية مع الحفظ والتكرار، مع استخدام تسلسل تدريجي لا يربك المتعلّم. من الميزات الفنية والعلمية للكتاب: اللغة فصيحة يسيرة، والأسلوب منسَّق بين التبليغ والنصح والتوجيه، ويضم فهرسًا مفصَّلًا يُسهِّل الرجوع إلى الموضوعات، كما يجمع بين نظر الحفظ وتجويد التلاوة، وهو مزيج قليل الوجود في المراجع، مما يضفي عليه أصالة. الفئة المستهدفة من الكتاب هم طُلاب التحفيظ والمبتدئون في علوم القرآن والتجويد، والمعلمون والمقرئون الذين يرغبون في دمج الحفظ مع الأداء السليم، فهم يجدون فيه دليلاً شاملاً يُسدّد خطواتهم. والقيمة العلمية والثقافية التي يضيفها الكتاب تتمثل في أنه لا يقتصر على الحفظ المجرد ولا على التلاوة بمعزل عن الحفظ، بل يعكس رؤية متكاملة تربط بين حفظ القرآن وأدائه بالصورة التي اقتداها النبي ﷺ، فتسهم في رفع جودة التلاوة بين حفظة القرآن، وتقويم الأداء القرائي ليكون مقرونًا بالمعرفة الصحيحة لأحكام التلاوة والتجويد.
الفهرس
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الصفحة |
الموضوع |
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5 |
المقدمة |
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9 |
الباب الأول |
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11 |
الفصل الأول |
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11 |
فضل القرآن الكريم وأسماؤه والمسميات التي ذكرت فيه |
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13 |
فضل القرآن الكريم |
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14 |
ما هو القرآن الكريم |
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14 |
أما الحديث القدسي |
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16 |
إعداد القرآن الكريم |
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19 |
القرآن المكي والمدني |
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20 |
نزول الوحي بالقرآن الكريم |
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21 |
أسماء القرآن الكريم |
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22 |
أسماء سور القرآن الكريم وأقسامها |
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25 |
مسميات ذكرت في القرآن الكريم |
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25 |
من أسماء الملائكة |
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25 |
من أسماء الأنبياء والرسل في القرآن الكريم |
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26 |
من الأقوام |
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26 |
من أسماء القبائل |
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26 |
من أسماء النساء في القرآن الكريم |
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26 |
من أسماء الكفار في القرآن الكريم |
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26 |
من أسماء الأصنام في القرآن الكريم |
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26 |
من أسماء الجن في القرآن الكريم |
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26 |
من أسماء الكواكب في القرآن الكريم |
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27 |
من أسماء الأماكن الأخروية |
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27 |
من أسماء الطير في القرآن الكريم |
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27 |
من أسماء البلاد في القرآن الكريم |
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29 |
الفصل الثاني |
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29 |
الأسباب الميسرة لحفظ القرآن الكريم |
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32 |
مصاحبة أهل القرآن وقراءة القرآن عليهم |
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33 |
مداومة التلاوة |
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34 |
المحافظة على الورد اليومي، وكيف يحزب القرآن |
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45 |
البكور |
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46 |
الاستعاذة بالله من الشيطان الرجيم عند الحفظ |
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47 |
قراءة ما تحفظه من القرآن في الصلاة |
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47 |
أولا : قراءته القرآن في صلاة الفريضة |
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48 |
ثانيا: قراءة من تحفظ ما القرآن في صلاة قيام الليل |
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49 |
ثالثا: قراءة ما تحفظه في صلاة النوافل |
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50 |
الجهر بقراءة القرآن الكريم |
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52 |
أن تفهم ما حفظته من القرآن |
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53 |
القراءة في الأوقات المباركة |
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54 |
قلة الانشغال بالدنيا |
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55 |
الصبر على الحفظ |
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56 |
النية الصادقة |
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58 |
ترك المعاصي |
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59 |
الإلحاح في الدعاء |
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60 |
أن ما تحفظه في أي مكان طاهر |
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61 |
الحفظ في الصغر |
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62 |
الاستعانة بالله عند الحفظ |
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64 |
أن تكتب ما تحفظه |
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65 |
المداومة على ما كان يقرؤه النبي ﷺ في أوقات مخصوصة |
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66 |
ثانيا: الطرق العملية للحفظ |
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66 |
طريقة الحفظ الجمعي |
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66 |
الحفظ التسلسلي |
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66 |
الحفظ المقسم |
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67 |
الفصل الثالث من آداب الحفظ والتلاوة |
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69 |
السواك |
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69 |
استقبال القبلة |
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69 |
الطهارة |
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69 |
يستحب البكاء عند القراءة |
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70 |
الاستعاذة بالله من الشيطان الرجيم |
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70 |
التعوذ عند آية العذاب |
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70 |
أن يتدبر ما فيه |
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70 |
تحسين الصوت بالقرآن |
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71 |
استذكار القرآن وتعاهده وعدم نسيانه |
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72 |
يستحب الاجتماع لقراءة القرآن الكريم |
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72 |
أن تكون القراءة على ترتيب المصحف |
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72 |
يكره الحديث مع أي إنسان أثناء القراءة |
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72 |
يسن السجود عند قراءة أي آية من آيات السجود |
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72 |
يستحب عند ختم القرآن ما يأتي |
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72 |
يجمع أهله |
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72 |
صيام يوم الختم |
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72 |
الدعاء |
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72 |
الشروع في أخرى |
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75 |
الباب الثاني كيفية حفظ القرآن الكريم بقراءة صحيحة كقراءة النبي ﷺ |
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77 |
الفصل الأول معرفة علم التجويد |
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79 |
التجويد في اللغة |
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79 |
التجويد اصطلاحا |
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81 |
مراتب القراءة |
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81 |
أولاً: التحقيق (قراءة النبي ﷺ) |
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82 |
ثانيا : الحدر |
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82 |
ثالثا: التدوير |
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83 |
الفصل الثاني |
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85 |
أولا : مخارج الحروف وصفاتها |
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91 |
ثانيا : التفخيم والترقيق |
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94 |
ثالثا : أحكام الوقف والابتداء |
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97 |
الفصل الثالث أحكام بعض الحروف |
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99 |
أولا: النون الساكنة والتنوين |
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99 |
أحكام النون الساكنة والتنوين |
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101 |
الإظهار |
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104 |
الإدغام |
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107 |
الإقلاب |
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108 |
الإخفاء |
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113 |
ثانيا: حكم النون والميم المشددتين |
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114 |
ثالثا: حكم لام أل |
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114 |
اللام القمرية |
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115 |
اللام الشمسية |
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116 |
رابعا: أحكام الميم الساكنة |
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116 |
الإخفاء الشفوي |
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117 |
الإدغام المثلين الصغير |
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118 |
الإظهار الشفوي |
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120 |
خامسا : لام الفعل الساكنة |
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122 |
سادسا : لام الحرف الساكنة |
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123 |
الفصل الرابع |
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125 |
أولاً: تاء التأنيث |
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126 |
ثانيا: همزة الوصل |
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127 |
ثالثا: المقطوع والموصول |
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129 |
الفصل الخامس |
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131 |
أولاً: أحكام المد |
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132 |
المد الأصلي (الطبيعي) |
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132 |
المد الفرعي |
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132 |
أ- المد بسبب الهمزة |
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133 |
واجب متصل |
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134 |
جائز منفصل |
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135 |
مد البدل |
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136 |
ب -المد بسبب السكون |
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136 |
المد العارض للسكون |
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137 |
المد بسبب السكون اللازم |
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138 |
أ- المد اللازم الكلمي المثقل |
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139 |
ب- المد اللازم الكلمي المخفف |
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139 |
ج- المد اللازم الحرفي المثقل |
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140 |
د -المد اللازم الحرفي المخفف |
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141 |
أنواع أخرى للمد |
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141 |
أولاً : مد الصلة |
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142 |
ثانيا: مد الفرق |
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142 |
ثالثا: مد العوض |
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142 |
رابعا: مد التمكين |
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142 |
خامسا: مد اللين |
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143 |
سادسا: مد التعظيم |
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144 |
ثانيا : المتجانسان والمتباعدان |
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144 |
المتجانسان |
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144 |
كبير |
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144 |
صغير |
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144 |
مطلق |
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145 |
المتباعدان |
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146 |
ثالثا: المثلان والمتقاربان |
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146 |
المثلان كبير - صغير – مطلق |
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147 |
المتقاربان (كبير - صغير – مطلق) |
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149 |
الخاتمة |
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150 |
المراجع |
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151 |
الفهرس |